What is Transgender? Choice or Science / Biological Truth.

What is Transgender? Choice or Science| Biological Truth. Source guide
नमस्ते सेक्स जेंडर सेक्सुअलिटी तीनों अलग-अलग चीजें हैं सेक्स का मतलब होता है मैं मेल हूं या फीमेल सेक्स जो है वो होता है बॉडी से सेक्स होता है हार्मोन से सेक्स होता है बॉडी के फंक्शनिंग से जेंडर जेंडर थोड़ा सा अलग है जेंडर ये है कि मुझे दिमाग से भी लगता है मेरे मन से भी लगता है कि मैं मेल हूं यानी जेंडर साइकोलॉजिकल है सेक्स फिजिकल है सेक्सुअलिटी सेक्सुअलिटी एक तीसरी चीज है सेक्सुअलिटी यह बताती है कि कोई आदमी सेक्सुअली एक्टिव जब होगा जब वो शारीरिक संबंध किसी के साथ बनाएगा फिजिकल रिलेशंस बनाएगा तो उसकी फीलिंग्स टुवर्ड्स मेल होंगी फीमेल होंगी या कैसे होंगी उसको कहते हैं सेक्सुअलिटी अब आज इसकी जिक्र क्यों कर रहे हैं इसका जिक्र इसलिए करना जरूरी है कि गवर्नमेंट ऑफ इंडिया ने पार्लियामेंट में पास किया है ट्रांसजेंडर बिल ट्रांसजेंडर बिल में क्या है इस पे बातें खूब न्यूज़पेपर्स में आ रही है लेकिन कमाल की बात यह है बहुत सारे लोग ऐसे हैं जिनको ट्रांसजेंडर इंटरसेक्स इन चीजों का मतलब ही नहीं पता कुछ लोग समझते हैं ट्रांसजेंडर मतलब के कुछ लोगों को लगता है ट्रांसजेंडर मतलब एलजीबीटी क्यू कुछ लोगों को लगता है ट्रांसजेंडर मतलब लेसबियन कुछ लोगों को लगता है ट्रांसजेंडर मतलब हिजड़ा कुछ लोग बोलते हैं किन्नर कुछ लोग कुछ और बोल देते हैं साउथ इंडिया में कर्नाटका में मैंने सुना था जोगप्पा बोलते हैं कुछ और जगहों पर कुछ और नाम है महाभारत में भी एक पात्र आता है इन सारी चीजों को जब हम साइंस की नजर से देखते हैं तो पता लगता है ये तो बायोलॉजी का टॉपिक है बायोलॉजी इस चीज को कैसे एक्सप्लेन करती है साइंस इस चीज को कैसे एक्सप्लेन करती है चलिए आज हम समझते हैं सबसे पहले तो मैं यहां पर ये क्लियर कर दूं कि ट्रांसजेंडर जो है वो हंसने की चीज नहीं है ठीक है सबसे पहली चीज ये समझनी है ट्रांसजेंडर होना कोई पाप नहीं है ट्रांसजेंडर होना कोई बीमारी नहीं है ये सिर्फ एक बायोलॉजिकल रियलिटी है जिसको मॉडर्न न्यूरो साइंस प्रूफ कर चुका है और आयरनी ये है हंसने वाली बात ये है कि जहां एंशिएंट सिविलाइजेशन के लोग इनको रेस्पेक्ट से देखते थे आज ऐसे लोग हैं जो इनका मजाक उड़ाते हैं तो चलिए शांति से लॉजिक से साइंस से समझते हैं कि ट्रांसजेंडर होते क्या है तो सबसे पहले हमें वही चीज समझनी है कि सेक्स क्या होता है तो सबसे पहले देखो सेक्स की बात जब आती है तो सबको पता है कि सेक्स तीन तरह के होते हैं अब तीन तरह के कैसे हो सकते हैं सबसे पहला होता है मेल जैसे मैं एक मेल हूं तो मेल मेल क्यों है मेल मेल इसलिए है कि उसके अंदर क्रोमोजोम है एक्स व फीमेल फीमेल क्यों है फीमेल इसलिए फीमेल है कि उसमें क्रोमोजोम है एक्स एक्स अब जो मेल होता है सारी दुनिया जानती है उसको इस तरह से दिखाया जाता है फीमेल जो होती है सबको पता है उसको इस तरह से दिखाया जाता है कुछ जगहों पर कलर्स में भी डिफरेंशिएशन होता है एआई भी कलर्स में डिफरेंशिएशन करता है मेल का एनिमेशन ब्लू में बनाता है फीमेल का एनिमेशन पिंक में बनाता है इन दोनों के अलावा एक और होता है इंटरसेक्स इंटरसेक्स क्या होता है इंटरसेक्स को ऐसे समझिए कि इनके सेक्सुअल कैरेक्टरिस्टिक में वेरिएशन आ जाता है सेक्सुअल कैरेक्टरिस्टिक क्या है तो सेक्सुअल कैरेक्टरिस्टिक का मतलब है कि जैसे हॉर्मोंस जैसे टेस्टिकल्स जैसे वाइना जैसे पीनस यानी कि जो जेाइटल ऑर्गन्स हैं उनमें कुछ चेंजेस अगर आ जाए तो उसको इंटरसेक्स की कैटेगरी में डाल देते हैं ये अक्सर क्रोमोजोमल या हॉर्मोनल एब्नॉर्मलिटीज की वजह से होता है अब जैसे ही आप बात करते हैं कि सेक्स अब सेक्स की बात जब आप करते हैं तो सबसे पहली चीज आपको ये पता होनी चाहिए कि सेक्स का मतलब बायोलॉजिकल सेक्स यानी जैविक लिंग सेक्स का मतलब है बायोलॉजिकल मेकअप कैसा है हमारा हमारे क्रोमोजोम कैसे हैं हमारे गोनेड्स कैसे हैं गोनेड्स मतलब जननांग कैसे हैं उनसे ही डिसाइड होता है हॉर्मोंस कैसे हैं और हमारे क्रोमोजोम्स हमारे गोनेड्स हमारे हॉर्मोंस ये तीनों मिलकर डिसाइड करते हैं कि हमारे जो बॉडी का बायोलॉजिकल मेकअप कैसा होगा फॉर एग्जांपल दो तरह की चीजें होती है एक होता है एंड्रोजन एक होता है एस्ट्रोजन एंड्रोजन का मतलब मेल के हॉर्मोन एस्ट्रोजन का मतलब फीमेल के हॉर्मोन तो किसी बॉडी के अंदर अगर एस्ट्रोजन डोमिनेट कर रहे हैं तो इसका मतलब वो फीमेल बॉडी है अगर किसी बॉडी में एंड्रोजन डेवलप कर रहे हैं एंड्रोजन डोमिनेंट कर रहे हैं मतलब वो मेल बॉडी है अब एक्स व क्रोमोजोम का कनेक्शन टेस्टिस से है एक्स व क्रोमोजोम का मतलब टेस्टोस्टेरोन से है और टेस्टोस्टेरोन को एंड्रोजन की कैटेगरी में डालते हैं अब यहां पर एक छोटी सी बात मैं बता दूं क्रोमोजोम्स में गड़बड़ हो जाए जैसे आप इसको ऐसे समझ सकते हैं कि नॉर्मल जो कोई भी मेल है उसकी बात अगर हम करें और उसके क्रोमोजोम्स को देखें तो हमें उसमें मिलेंगे 22 पेयर्स 22 जोड़े एक्स एक्स क्रोमोजोम के और 23वां या 23 क्रोमोजोम जो मिलेगा वो मिलेगा xy और टोटल जो होते हैं ये पेयर है भाई पेयर मतलब जोड़े तो टोटल हो गए 44 + 2 46 क्रोमोसोम हो गए 46 में से अगर मैं डिवाइड करूं तो मैं ये कहूंगा 45 तो x है क्योंकि क्योंकि ये हो गए 44 प्लस 45वां ये और 46 जो है वो y हो गया अब 46 क्रोमोसोम y है तो मैं मेल हूं अब होता क्या है कि कभी-कभी ऐसे भी केसेस आते हैं कि जो 22 जोड़े होते हैं 22 पेयर होते हैं वो तो x एक्स ही होते हैं लेकिन जो 23 पेयर है वो हो जाता है x व या वो हो सकता है x व एक्स अब जैसे ये होता है इसको बोलते हैं क्लाइन फिल्टर सिंड्रोम अब क्लाइम फिल्टर सिंड्रोम में क्या होगा मेल फीमेल दोनों के लक्षण उसके अंदर डेवलप होने शुरू हो जाएंगे तो ऐसी कंडीशन जब हो जाती है तो उसको कहते हैं इंटरसेक्स इंटरसेक्स का मतलब उसमें मेल के भी लक्षण है और फीमेल के भी लक्षण है लेकिन फिर बता रहा हूं इंटरसेक्स होना भी कैसा है ये भी बायोलॉजिकल गेम है बायोलॉजिकल मेकअप है तो आगे से कोई ये पूछे कि सेक्स और जेंडर में डिफरेंस बताओ तो जेंडर तो अभी मैं बता दूंगा सेक्स की बात आती क्या है बायोलॉजिकल मेकअप है सेक्स कैसे डिसाइड होता है तीन चीजों से डिसाइड होता है नंबर वन क्रोमोजोम्स से नंबर टू गोनेड्स जननांग और नंबर थ्री हॉर्मोंस ये तीनों चीजें मिलके डिसाइड करती हैं कि आपका सेक्स क्या होगा आप मेल होंगे फीमेल होंगे या इंटरसेक्स होंगे यहां तक बात समझ में आ गई होगी फिर अगली चीज पे चलते हैं अब आता है जेंडर जेंडर वो चीज है जिसको कहा जाता है लिंग पुल्लिंग स्त्रीलिंग कि मेल या फीमेल अब जैसे ही आप इससे आगे जाते हैं कि भाई जेंडर तो जेंडर आते ही आपको याद रखना है कि अब गेम बदल रहा है कि ये क्या हो रहा है अब ये सोशल और साइकोलॉजिकल चीज आ रही है तो सबसे पहली चीज तो आपको ये बतानी है कि जेंडर क्या चीज है कि जेंडर सोशल है जेंडर बिहेवियरल है जेंडर जो है यह कल्चरल है अब ये क्या वाला है सोशल अब ध्यान से सुनना मैं एक मेल हूं मैं एक मेल हूं कौन से वाला बात कर रहा हूं मैं सेक्सुअली एक मेल हूं और मुझे सोसाइटी ने भी यह बताया कि भाई तू लड़का है मुझे यह फील भी होता है कि मैं एक मेल हूं तो इसका मतलब मेरा ध्यान से सुनना इसका मतलब मेरा सेक्स भी मेल है और मेरा जेंडर भी मेल है तो मतलब बॉडी जो सोचती है बॉडी को जो लगता है वो है सेक्स और मन को जो लगता है वो है जेंडर अब हमें ये देखना है कि जेंडर के बेसिस पर लोग कितने तरह के हो सकते हैं तो अब सबसे इंपॉर्टेंट टर्म आता है यहां पे एक होता है सिस और एक होता है ट्रांस ध्यान से सुनना एक होता है सिस एक होता है ट्रांस ये हम किसकी बात कर रहे हैं जेंडर की तो सिस कौन होते हैं और ट्रांस कौन होते हैं तो ध्यान से सुनना कोई आदमी का जो सेक्स है वही उसे जेंडर की फॉर्म में फील हो यानी एक फीमेल है उसकी बॉडी भी फीमेल है और उसका माइंड उसका मन कहता है कि वो फीमेल है तो मतलब वो सिस जेंडर है वो सिस जेंडर है इसका मतलब मैं यह कह सकता हूं कि मैं सिस जेंडर हूं लेकिन हम में से कोई भी हो उसमें अगर ऐसा हो जाए कि उसका सेक्स जो है वह अलग हो और उसे जेंडर अलग फील हो फॉर एग्जांपल एक लड़की जो लड़की की तरह पैदा हुई कैसे पता लगा कि लड़की पैदा हुई उसके ऑर्गन देखे मतलब यह देखा गया कि उसका सेक्स क्या है पैदा होते ही सबको बोल दिया कि लड़की हुई है लेकिन जब वो बड़ी हुई प्यूबर्टी हिट करने लगी तो उस लड़की को यह लगने लग गया कि वो लड़की नहीं है वो लड़का है अब जैसे उसको लग रहा है तो वो उसका क्या है वो है उसका जेंडर तो मतलब जन्म के समय या बायोलॉजिकल मेकअप कुछ अलग था और जब वो बड़ा हुआ इंसान एज बढ़ी तो उसके ब्रेन ने उसके सेल्फ परसेप्शन में परसेप्शन का मतलब खुद की इमेज क्या बना रही है उसके इंटरनल सेंसेस ने उसको जो बताया वो उसका जेंडर है यहां पर एक बहुत इंपॉर्टेंट चीज याद रखनी है कि ये जो होता है ये सोसाइटी से भी इन्फ्लुएंस्ड होता है लेकिन इसका बहुत तगड़ा बायोलॉजिकल कनेक्शन है इसको हम आगे अभी न्यूरो साइंस के फील्ड में जब जाएंगे तब हम देखेंगे समझ में आ गया होगा कि सेक्स क्या होता है और जेंडर क्या होता है सेक्स और जेंडर में डिफरेंस क्या होता है है ना बायोलॉजिकली हम जो है वो हमारा सेक्स है मेंटली हम जो है वो हमारा जेंडर है अब ध्यान से सुनना जैसे ही मैं कहता हूं कि जेंडर तो यहां पर फिर एक चीज निकल के आती है कि जेंडर कितने टाइप का हो सकता है तो जेंडर तीन टाइप का हो सकता है आगे अपन चौथा पांचवा कुछ होगा वो भी समझेंगे सबसे पहला हो सकता है ट्रांसजेंडर वुमेन अब ध्यान से सुनना ट्रांसजेंडर वुमेन की बात जब आती है तो इनको ऐसे लिखा जाता है मेडिकल साइंस में एम देन स्मॉल टी एंड देन एफ ऐसे ही दूसरा जो होता है ट्रांसजेंडर मैन उसको ऐसे लिखा जाता है एफ देन स्मॉल टी एंड देन एम तो इसका मतलब क्या है इसका मतलब है कि सेक्स जो था वो था मेल बट इनका जेंडर हो गया फीमेल सेक्स था मेल जेंडर हो गया फीमेल यहां पर सेक्स था फीमेल और इनका जेंडर हो गया मेल तो हम इनको क्या बोलेंगे इनको बोलेंगे हम ट्रांसजेंडर फीमेल या वुमेन और इनको हम क्या बोलेंगे इनको बोलेंगे ट्रांसजेंडर मैन क्यों क्योंकि इनको यह लगता है कि यह फीमेल है इनको यह लगता है कि यह मेल है तो इसका मतलब मैं यह कह सकता हूं कि जब भी कभी कहीं पर लिखा जाएगा कि फलानी जो है वो ट्रांसजेंडर वुमेन है तो इसका मतलब उसका जन्म के समय मेल सेक्स था और उसको सोशली या साइकोलॉजिकली या इंटरनल परसेप्शन से या जेंडर के बेसिस पे उसको ये लगने लग गया कि वो फीमेल है ऐसे ही ट्रांस मेल भी होते हैं ट्रांस मैन भी होते हैं ट्रांस मैन वह होते हैं जो पैदा लड़की की फॉर्म में होते हैं लेकिन बाद में खुद को आदमी या लड़का बनाना चाहते हैं या जिनको यह लगता है कि वह लड़का है यह हुआ ट्रांस जेंडर ट्रांस मतलब जो है वो नहीं दूसरे वाला एक और आता है जिनको कहते हैं नॉन बाइनरी या जेंडर क्वीर नॉन बाइनरी क्या होते हैं कि ये जो है ये दोनों को बोलते हैं कि भाई ना तो मैं मेल हूं ना मैं फीमेल हूं और इन्हीं के अंदर एक और आ जाता है जिसको बोल देते हैं फ्लूइड कि फ्लूइड का मतलब कि जेंडर फ्लूइड मतलब इनको कभी मेल लगता है कभी फीमेल लगता है कभी इनको ये लगता है कि मैं दोनों ही नहीं हूं ये तीनों जो आते हैं ये तीनों के तीनों ट्रांसजेंडर में आते हैं तो जो बिल आया है वो इंटरसेक्स के लिए नहीं है वो बिल आया है ट्रांसजेंडर के लिए पहली चीज होपफुली यहां तक ये क्लियर हुआ होगा अब अपन समझते हैं सबसे इंपॉर्टेंट चीज अगली चीज आती है सेक्सुअलिटी सेक्सुअलिटी क्या होती है सेक्सुअलिटी का मतलब होता है कि आप सेक्सुअली अट्रैक्ट जब होंगे एक उम्र के बाद ऑपोजिट सेक्स की तरफ अट्रैक्शन आता है तो वो जो सेक्सुअल ओरिएंटेशन होता है वो क्या होगा जिसको हिंदी में कहते हैं यौन आकर्षण सेक्सुअलिटी का मतलब है कि आप किसकी तरफ अट्रैक्ट होंगे अब ये जो होता है ये दो तरह का होता है एक होता है ये सुने होंगे वर्ड आपने सेक्सुअलिटी सेक्सुअलिटी मतलब यौन संपर्क या यौन आकर्षण कैसा होगा तो एक होते हैं हेट्रोसेक्सुअल एक होते हैं होमोसेक्सुअल हेट्रोसेक्सुअल जो होंगे हेट्रो का मतलब विषम तो ये विपरीत लिंग की तरफ अट्रैक्ट होंगे जैसे एक लड़का है उसको अट्रैक्शन हो गया है एक लड़की के लिए तो इस रिलेशनशिप को कहा जाएगा हेट्रोसेक्सुअल फिर होमोसेक्सुअल क्या होगा होमोसेक्सुअल होगा कि एक लड़की दूसरी लड़की की तरफ अट्रैक्ट हो रही है इस तरह का जो होता है उसको लेसबियन कहा जाता है ऐसे ही एक होता है एक लड़का एक लड़के की तरफ अट्रैक्ट हो रहा है तो इसको कहा जाता है ए ऐसे ही अगर कोई लड़का या कोई लड़की ऐसी है जो लड़की के लिए भी अट्रैक्शन फील कर रही है और लड़के के लिए भी अट्रैक्शन फील कर रही है दैट इज बाईसेक्सुअल एलजीबीटी वाला बात कर रहे हैं ऐसे ही कोई लड़का है वह लड़के के लिए भी अट्रैक्ट फील कर रहा है और उसको लड़की के लिए भी अट्रैक्शन फील हो रहा है दैट इज़ आल्सो एन एग्जांपल ऑफ़ पी मतलब बाईसेक्सुअलिटी तो सेक्सुअलिटी क्या होती है सेक्सुअलिटी का मतलब है फिर बोल रहा हूं कि आपका किसकी तरफ अट्रैक्शन हो रहा है अब यहां पर हम ये अच्छे से समझ गए हैं कि आज के बाद हमसे कोई बात करेगा कि सेक्स और जेंडर अलग-अलग होते हैं क्या आपके यस क्या सेक्सुअलिटी अलग होती है यस सेक्सुअलिटी इन दोनों से ही अलग है सेक्सुअलिटी रिलेशनशिप बनाने की जो चाहत होती है इच्छा होती है अट्रैक्शन होता है उसकी बात होती है अब आती है सबसे इंपॉर्टेंट चीज क्योंकि अपना टॉपिक आज का ट्रांस जेंडर है तो हम ट्रांसजेंडर पर फोकस करेंगे अब आती है चीज कि डब्ल्यूho कैसे डिफाइन करता है ट्रांस जेंडर को तो डब्ल्यूho क्या बोलता है डब्ल्यूho बोलता है ट्रांसजेंडर वो होते हैं जिनका जेंडर सेक्स से अलग होता है मतलब जो डेफिनेशन हमने समझी जो डेफिनेशन हमने बनाई वही डेफिनेशन डब्ल्यूho ने आजमाई डब्ल्यूho क्या बोलते हैं कि ट्रांसजेंडर वो लोग होते हैं जिनका जेंडर आइडेंटिटी उनकी बर्थ असाइन सेक्सुअल आइडेंटिटी से अलग होता है उसे कहते हैं ट्रांसजेंडर सिंपल भाषा में मैं यह कह सकता हूं कि कोई आदमी एक्स व क्रोमोजोम के साथ पैदा हुआ उसका शरीर मेल है उस लेकिन उसको फीलिंग ये आने लग गई कि वो एक फीमेल है तो वो एक ट्रांसजेंडर वुमेन है इसी को हम लिख रहे थे एम टी एफ इसका उल्टा अगर होगा तो वो हो जाएगा मेल उसको हम कैसे लिखेंगे एफ टी एम अब अपने को एक इंपॉर्टेंट चीज समझनी है वो इंपॉर्टेंट चीज क्या है वो इंपॉर्टेंट चीज है कि बायोलॉजी कि ट्रांसजेंडर जो है वो बनते कैसे हैं कि ऐसा कैसे हो सकता है कि कोई आदमी पैदा तो मेल हुआ और उसे फील यह होने लग गया कि वह फीमेल है हाउ इट इज पॉसिबल और जिस चीज पर लोग हंसते हैं जिस चीज पर बात करने से लोग डरते हैं जिसकी वजह से एक स्टिग्मा बना हुआ है ये उसकी असली साइंस आप समझेंगे तो आप आज के बाद किसी भी ट्रांसजेंडर पर नहीं हंसने वाले हैं अब मैं आपको वो चीज बताने वाला हूं जिसको सुनकर आपका ब्रेन जो है एक्सप्ललोड होगा अरे यह ऐसे होता है तो ट्रांस जेंडर जो है उसका बायोलॉजिकल बेसिस अपने को समझना है ट्रांसजेंडर का बायोलॉजिकल बेसिस समझने के लिए अपने को सबसे पहले यह समझना पड़ेगा कि आदमी का सेक्स कैसे डिसाइड होता है तो आदमी के सेक्स को डिसाइड करने के लिए हमें ये याद रखना है कि जो मैंने अभी बोला कि जो मेल होता है उसमें और फीमेल में क्या डिफरेंस रहता है तो आपको यह चीज पता होगी कि मेल में और फीमेल में दोनों में 22 पेयर्स एक्स एक्स क्रोमोसोम के होते हैं लेकिन मेल का जो 23 पेयर होता है वो होता है xy और फीमेल का 23 होता है x एक्स यह डिफरेंस होता है अब बहुत ही इंपॉर्टेंट चीज है कि यह एक मां है अब मां के पेट में बच्चा बन रहा है अब मां के पेट में बच्चा जब बनना शुरू होता है तो ना वो मेल होता है ना वो फीमेल होता है होता क्या है कि छठे से 14वें हफ्ते में सिक्स्थ से 14th वीक के अंदर एक जीन एक्टिवेट होता है ये जीन जो है यह सिर्फ वाई पे मिलता है इसको बोलते हैं एसआरवाई जीन यह जीन कब एक्टिवेट होता है सिक्स्थ से 14th वीक के अंदर यह जीन एक्टिवेट होता है अब बहुत ही इंपॉर्टेंट चीज है ध्यान से सुनना अगर व क्रोमोसोम है तो ही तो एसआरवाई होगा नहीं तो एसआरवाई होगा ही नहीं अब व क्रोमोसोम की वजह से एसआरवाई है और एसआरवाई अगर है और वो एक्टिवेट हुआ है तो जो बच्चा है उस बच्चे में टेस्टिस बनेंगे टेस्टिस मतलब वृषण बनेंगे अदरवाइज वह बच्चा जो है अगर एक्स एक्स हुआ तो बच्चे में एसआरवाई नहीं है और एसआरवाई नहीं है तो बाय डिफॉल्ट जो मदर है वह फीमेल बना देगी तो इसका मतलब मेल होगा या फीमेल होगा यह डिपेंड करता है टेस्टिस बनेंगे या नहीं बनेंगे और टेस्टिस बनेंगे या नहीं बनेंगे ये डिपेंड करता है एसआरवाई जीन पे और एसआरवाई जीन जो होता है इसी से एक्टिवेट होता है एक प्रोटीन थोड़ा पैरामेडिकल्स वगैरह पढ़ रहे हैं तो उन लोगों को याद रखना है इसका नाम भी टीडीएफ टीडीएफ क्या होता है टेस्टिस डिटरमाइनिंग फैक्टर कहते हैं एसआरवाई जीन एक सिग्नल देता है जिससे ये प्रोटीन बनता है टेस्टिस डिटरमाइनिंग फैक्टर और इसी की वजह से मेल जो है वो मेल बनता है अगर एसआरवाई जीन नहीं है तो ओवरीज बनेगी इस्ट्रोजन आएगा इस्ट्रोजन पाथवे एक्टिवेट होगा और वो फीमेल बन जाएगी अब यहां एक बहुत ही इंपॉर्टेंट चीज आती है जैसे मैंने कहा छठे से 14वें हफ्ते के बीच में जो है एक्टिवेट हो रहा है एसआरवाई जीन इसी की वजह से बन रहा है मेल फीमेल अब ध्यान से सुनना छठे से 14वें हफ्ते के बीच में मां के अंदर ये डिसीजन हो गया कि ये बॉडी से मेल बनेगा या फीमेल बनेगा लेकिन ब्रेन का डेवलपमेंट अब तक उतना नहीं हुआ है कि वह खुद को मेल जाने या फीमेल जाने अब औरत प्रेग्नेंट है और औरत मान लो स्ट्रेस लेती है बहुत ज्यादा औरत प्रेग्नेंट है और वो प्लास्टिक बहुत यूज़ कर रही है स्पेशली थैलेट वगैरह थैलेट क्या होता है जो प्लास्टिक की बतल्स वगैरह होती है उनके अंदर होता है पीवीसी पाइप्स के अंदर होता है परफ्यूम्स वगैरह होते हैं इनके अंदर भी होता है ये वाले केमिकल्स जो है ये जब अंदर जाएंगे तो ये क्या करते हैं ये हॉर्मोंस जो है उनको मिमिक करते हैं हॉर्मोस को डिस्टर्ब करते हैं या कुछ जेनेटिक फैक्टर भी हो सकते हैं या हो सकता है कोई बीमारी हो गई हो एंड्रोजन कुछ दिक्कत हो गई हो हॉर्मोंस की इससे भी होता है कई बार प्लेसेंटा जो है उसका कनेक्शन सही नहीं बैठ रहा हॉर्मोनस की सप्लाई प्रॉपर नहीं मिल रही उससे भी होता है बहुत सारे रीज़न हो सकते हैं लेकिन बहुत इंपॉर्टेंट चीज आपको समझनी है कि सिक्स्थ से 12th वीक 14th वीक में तो ये डिसाइड हो रहा है कि वो लड़का बनेगा या लड़की बनेगा फिजिकली और 16th वीक से ले और 20th वीक के बीच में 24 वीक के बीच में होगा क्या 24 यहां पर ज्यादा सही रहेगा 16th वीक से 24 वीक के बीच में क्या होगा कि ब्रेन जो है ब्रेन में ये पता लगेगा कि तू मेल है या फीमेल है इसका मतलब कितनी गजब की बात है साइंस की कि बच्चे का सेक्स डिसाइड होता है तब जब बच्चा मां के पेट में छठे से 14वें हफ्ते के बीच में है एसआरवाई जीन से लेकिन बच्चे का जेंडर जो बच्चे को यह बताएगा कि तू मेल है या फीमेल है ये डिसाइड होता है इसके बाद इस बीच वाले पार्ट को बोलते हैं क्रिटिकल विंडो ऑफ जेंडर मतलब बच्चा मां के पेट में था छठे से 14वें हफ्ते में ये डिसाइड हुआ वो मेल है या फीमेल बॉडी के हिसाब से पेनिस बनेगा टेस्टिस बनेंगे वाइना बनेगी कौन सा हॉर्मोन होगा ये उसका सेक्स बनाएगा और बच्चा जब 16वें से 24वें हफ्ते के बीच में आया तब बच्चे के ब्रेन को ये पता लगा हॉर्मोंस के इफेक्ट से कि तू मेल है या फीमेल है अब अगर मास स्ट्रेस स्ट्रेस लेती है अगर मां प्लास्टिक बहुत यूज करती है अगर मां की कोई बीमारी है अगर मां की प्लेसेंटा हिल गई या कोई और अननोन रीजन है तो उन वजहों से अगर इस टाइम अब बच्चा चाहे मेल हो चाहे फीमेल हो अगर उसके अंदर जाने वाले हॉर्मोन इनवर्ट हो गए इनवर्ट हो गए मतलब उसके ब्रेन को ये लगने लग गया कि तू मेल नहीं तू फीमेल है या उसके ब्रेन को ये लगने लग गया कि तू फीमेल नहीं मेल है तो वो बच्चा जब पैदा होगा तो उस बच्चे के बड़ा होते टाइम एक चीज आएगी चीज क्या आएगी कि उसका सेक्स अलग होगा और उसका जेंडर अलग होगा यह जो सेक्स और जेंडर अलग-अलग हुआ है इस बीच वाली विंडो के दौरान इसके बहुत सारे रीजन हो सकते हैं लेकिन इसका रिजल्ट एक होता है रिजल्ट एक क्या होता है वो बच्चा ट्रांस जेंडर बन जाएगा ये है ट्रांस जेंडर होने का बायोलॉजिकल बेसिस अब जैसे ही हमने कहा कि बहुत सारे रीजन है मैंने कहा कि मां को प्रेगनेंसी में स्ट्रेस दे रहे हो अब होता क्या है जब मां स्ट्रेस लेती है तो स्ट्रेस से एक हॉर्मोन जनरेट होता है जिसको कहते हैं कॉर्टिसोल कॉर्टिसोल एक बॉडी का ये मान के चलो एक प्लग है किसी भी आदमी का स्ट्रेस लेवल हाई होगा तो उसमें कॉर्टिसोल बढ़ जाएगा आपको बता दूं लेट नाइट स्क्रॉल करने से भी कॉर्टिसोल बढ़ता है अब कॉर्टिसोल जब बढ़ेगा तो कॉर्टिसोल क्या करता है टेस्टोस्टेरोन प्रोडक्शन को रिप्रोडक्शन फंक्शनिंग को डिस्टर्ब करता है मैंने अभी कहा था प्लास्टिक्स प्लास्टिक्स में सबसे ज्यादा आप बदनाम कर सकते हो बीपीए को सबसे ज्यादा बदनाम कर सकते हो थैलेट्स को सबसे ज्यादा बदनाम कर सकते हो डीईएस कैटेगरी के प्लास्टिक्स को अब ये जितने भी सिंथेटिक केमिकल्स हैं ये क्या करते हैं बॉडी में जाके हॉर्मोनस को मिमिक करते हैं अभी तक पता ही नहीं लगा है पेस्टिसाइड्स बहुत सारे हैं फार्मासटिकल्स बहुत सारे हैं प्लास्टिक्स बहुत सारे तरह के हैं तीसरे नंबर पे एक और रीजन होता है जेनेटिक वेरिएशंस अब जैसे किसी में मैंने कहा कि टेस्टोस्टरॉन जो है वो एंड्रोजन हॉर्मोन है एंड्रोजन मतलब मेल एंड्रोलॉजी एक ब्रांच आती है जिसमें मेल की बॉडी की स्टडी करते हैं तो एंड्रोजन हॉर्मोन जो है वो मान लो बॉडी के अंदर टेस्टोस्टरॉन बना रहा है अब हो क्या रहा है टेस्टोस्टरॉन बन रहा है बट ब्रेन के अंदर उसको रिसीव करने के लिए सिग्नल ही नहीं है क्यों नहीं है कि उसके अंदर एंड्रोजन रिसेप्टर्स जो है वो डिस्टर्ब चल रहे हैं तो उस केस में क्या होगा उसकी बॉडी के अंदर जेंडर और सेक्स जो है अलग-अलग हो जाएगा एक मैंने बताया था प्लेसेंटा जो है उसके अंदर कोई दिक्कत आ रखी हो तो भी बेबी का सेक्स और जेंडर जो है वो अलग-अलग हो सकते हैं अब बहुत सारी स्टडीज हुई है उनके अंदर बहुत सारे एविडेंस मिले हैं लेकिन कुछ डॉक्टर्स जो है उनका कहना है सिर्फ आप इसको बदनाम नहीं कर सकते या इसको ब्लेम नहीं कर सकते ये जो विंडो थी कि भाई सिक्स्थ वीक से ले और 14थ वीक तक ये हो रहा है और 16th वीक से 24 वीक तक ये हो रहा है तो फिर डॉक्टर्स का कहना है कि इसके अंदर एक बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन ब्रेन का है तो ब्रेन का तो पहले भी बता रहे वो कह रहे हैं नहीं हम बता रहे हैं जो चीज अलग है सुनिए ध्यान से कि क्या कि ये हमारा ब्रेन है और हमारे ब्रेन के अंदर एक सेंटर होता है जिसको कहते हैं हाइपोथैलेमस जो बच्चे कंपटीशन की प्रिपरेशन कर रहे हैं वो याद रखना बुखार का सेंटर हाइपोथैलेमस होता है हमारी बॉडी का टेंपरेचर हाइपोथैलेमस मेंटेन करता है भूख और प्यास हाइपोथैलेमस से लगती है हमारे इमोशंस सारे के सारे हाइपोथैलेमस में होते हैं हमें किसी से प्यार होता है गुस्सा आता है नफरत होती है कोई अच्छा लगने लग जाता है किसी की बातें सुनना अच्छा लगता है किसी का बिल्कुल सुनने का मन नहीं होता ये सारी चीजें हाइपोथैलेमस कंट्रोल करता है यहां तक कि हाइपोथैलेमस को बोलते हैं मास्टर ऑफ मास्टर पिट्यूटरी ग्लैंड जो होती है उसके सिर पर बैठा है इसीलिए कहते हैं किसी आदमी को खुश रखा जाए उस आदमी को मन से संतुष्ट रखा जाए तो वो आदमी लंबा जिएगा किसी आदमी को परेशान करो आप बार-बार तो वो आदमी जो है उसका हाइपोथैलेमस डिस्टर्ब होगा उसके सारे हॉर्मोनस डिस्टर्ब होंगे और उस आदमी की लाइफ जो है वो छोटी हो जाएगी कम हो जाएगी कॉर्टिसोल लेवल रेज रहेगा उसमें ये जो हाइपोथैलेमस होता है इस हाइपोथैलेमस में डॉक्टर्स का ये मानना है कि एक रीजन होता है जिसको कहते हैं पीएसटीसी रीजन पीएसटीसी रीजन जो है इसका फुल फॉर्म आता है बैड न्यूक्लियस ऑफ ट्रिया टर्मिनल सेंट्रल सब डिवीजन हमें इसके फुल फॉर्म में नहीं जाना है हमें सिर्फ यह याद रखना है कि हाइपोथैलेमस के पास में एक छोटू सा रीजन है जिसको बीएसटीएस रीजन कहते हैं बीएसटीसी रीजन कहते हैं अब ये जो बीएसटीसी रीजन है ये ऐसा माना जाता है कि सिस जेंडर जो होते हैं जनरली क्या होता है कि जो सिस जेंडर मतलब जो नॉर्मल दिखने वाले मेल जिनका जेंडर और सेक्स दोनों सेम है उनको सिस जेंडर कहते हैं तो फॉर एग्जांपल मैं अगर कहूं तो मैं सिस जेंडर का एग्जांपल लूं तो सिस जेंडर मेल जो होते हैं उनके अंदर बीएसटीसी बड़ा होता है ध्यान से सुनना सिस जेंडर फीमेल में बीएसटीसी छोटा होता है लेकिन होता क्या है जब कोई ट्रांसजेंडर वुमेन होती है जिसके अंदर क्रोमोजोम तो एक्स व है लेकिन उसको लग रहा है कि वह फीमेल है यानी एमटीएफ का केस है तो उस केस में उसका बीएसटीसी रीजन जो है वो छोटा रह जाता है यानी इसका उल्टा अगर मैं करूं तो हम ये कह सकते हैं कि ब्रेन में बीएसटीसी रीजन जो है वो जिसमें छोटा होना चाहिए उसमें बड़ा हो जाता है बड़ा होना चाहिए उसमें छोटा हो जाता है इसी वजह से इनको ये लगने लग जाता है कि हम जो है उस जेंडर के नहीं है जो हमारा सेक्स है इसी तरह से एक और रीजन बाद में आइडेंटिफाई किया गया जिसे आई एनएच रीजन कहा गया ये भी जो है ये भी ऐसा माना गया ये आई एनएचए आई एनए थ्री कहते हैं ये भी माना गया कि हाइपोथैलेमस के पास में ही होता है ये जो होता है इसका भी काम यही होता है कि ये भी जेंडर आइडेंटिटी ही करवाता है बहुत सारी स्टडीज हुई है कुछ लोग इसके लिए वाइट मैटर जो है उसको दोष देते हैं कि जो वाइट मैटर है वो जिम्मेदार है कि ब्रेन में वाइट मैटर की कनेक्टिविटी पता होगा ब्रेन में दो तरह का मैटर होता है वाइट मैटर और ग्रे मैटर के जो कनेक्टिविटी होती है उसके इश्यूज जो है उनकी वजह से बायोलॉजिकल सेक्स और जेंडर जो है वो मैच नहीं करता हमें सिर्फ यह याद रखना है कि जो जेंडर है और सेक्स है उनमें डिफरेंस क्या है और हमें ये पता होना चाहिए कि हमसे कोई पूछ ले कि बताओ जो ट्रांसजेंडर है वो कैसे होता है है तो हम यह बता सकते हैं कि ट्रांसजेंडर जो है वो हॉर्मोनल इनफ्लुएंस से हो सकता है ट्रांसेंडर ब्रेन की स्ट्रक्चर में डिफरेंस से हो सकता है और यह ट्रांसजेंडर जो है यह हेल्थ केयर जो होता है उससे एसोसिएटेड रहता है इसका मतलब अब हम यह कह सकते हैं कि ट्रांसजेंडर जो है वो आपकी हमारी ही तरह इंसान होते हैं और उन्हें जीने का पूरा हक होता है होपफुली इस सेशन

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